श्रीमान संचालक, लोक अभियोजन भोपाल म0प्र0 के मार्गदर्शन में आज दिनांक 15.03.2026 को पुलिस कन्ट्रोल रूम, दतिया मेेें जिला अभियोजन संचालनालय, दतिया के प्रभारी उपनिदेशक श्री आर.सी. चतुर्वेदी के द्वारा श्रीमान स्वप्निल वानखड़े, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, दतिया की अध्यक्षता में कार्यशाला आयोजित की गई थी।

उस कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय श्री अखिलेश कुमार धाकड़ प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दतिया तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमान सूरज कुमार वर्मा पुलिस अधीक्षक महोदय, जिला दतिया उपस्थित रहे। उक्त कार्यशाला में जिले के सभी लोक अभियोजक/अपर लोक अभियोजक तथा अभियोजन अधिकारी व उपपुलिस अधीक्षक तथा निरीक्षक स्तर के 10 पुलिस अधिकारी प्रतिभागी के रूप में भाग लिया गया।

कार्यशाला का उद्घाटन मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर माल्यार्पण किया गया तथा कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में श्री आर.सी. चतुर्वेदी, प्र.उपनिदेशक अभियोजन दतिया के द्वारा कार्यशाला की रूपरेखा को बताया गया कि एक दिवसीय कार्यशाला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत होने वाले अपराध तथा अनुसंधान के दौरान साक्ष्य का संकलन एवं अनुसंधान के दौरान अधिनियम के बाध्यकारी विधिक प्रावधानों का पालन के प्रावधान तथा न्यायालय के समक्ष गुणवत्तापूर्ण प्रभावशील सुदृढ़ पैरवी सुनिश्चित करने की अभियोजन संचालन में कार्यकुशलता से संबंधित विषय रखे गए थे। यह भी बताया है कि उक्त कार्यशाला में साइबर अपराध की प्रकृति, साक्ष्य का संकलन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की ग्राह्यता से संबंधित प्रावधान तथा मेडिको लीगल के प्रकार, लक्षण, समयावधि की जानकारी तथा डीएनए/एफएसएल प्रोफाइल को तैयार करना, साक्ष्य का संकलन तथा नवीन भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 के तहत समयावधि में अनुसंधान एवं विचारण कार्यवाही पूर्ण कराने में फॉरेंसिक विभाग की कार्ययोजना एवं चुनौतियां का विषय रखा गया था तथा विषय से संबंधित विशेषज्ञांे को ही व्याख्यान हेतु आहुत किया गया था।

कार्यशाला के उदघाटन भाषण सत्र के दौरान विशिष्ट अतिथि श्रीमान सूरज कुमार वर्मा, पुलिस अधीक्षक, जिला दतिया के द्वारा कार्यशाला में रखे गए विषय एवं आहुत किए गए विषय विशेषज्ञों को दृष्टिगत रखते हुए बताया गया कि अनुसंधान एवं अभियोजन संचालन के लिए कार्यशाला के विषय काफी उपयोगी है। सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के विषय विशेषज्ञ से अपनी शंका का समाधान प्राप्त करना चाहिए और ऐसी कार्यशाला उनके पदीय कार्य की दक्षता में वृद्धि होगी और सदैव उनके लिए उपयोगी रहेगी।

इसी प्रकार कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहे श्रीमान स्वप्निल वानखड़े, कलेक्टर महोदय, जिला दतिया द्वारा अपने उद्बोधन में स्वयं के साथ हुई घटना का अनुभव शेयर करते हुए बताया गया कि इस तरह की कार्यशाला हमेशा आयोजित होते रहना चाहिए और विषय विशेषज्ञों के ज्ञान व अनुभव का लाभ लोक सेवक द्वारा स्वयं लिये जाने वाले निर्णय में मदद मिलती है तथा अलग-अलग विभागों के मध्य टीम वर्क के कार्य को भी सफलतापूर्वक निष्पादन कराने में मदद मिलती है। साथ ही जिला कलेक्टर महोदय द्वारा सभी प्रतिभागियों को कार्यशाला के उपयोगी विषयों पर विशेषज्ञों के उद्बोधन को रूचि लेकर सुनने व विशेषज्ञों से अपने समाधान प्राप्त करने को कहा गया।

मुख्य अतिथि के तौर पर माननीय प्र.प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला दतिया के द्वारा अपने उद्बोधन में बताया गया कि कार्यशाला का विषय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के संबंध में हैं और इस कार्यशाला के प्रतिभागी ऐसे अपराधों का अनुसंधान करने वाले तथा अनुसंधान में एकत्रित साक्ष्य को न्यायालय के समक्ष प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने वाले है। कार्यशाला की सार्थकता तभी है, जबकि प्रतिभागी इस कार्यशाला में दिये जाने वाले जानकारियों को बारीकी से ध्यानपूर्वक श्रवण करें तथा विशेषज्ञों से अनुसंधान और अभियोजन के दौरान आने वाले कठिनाईयों के संबंध में समाधान प्राप्त करें।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र के समापन का आभार सुश्री संचिता अवस्थी, सहायक जिला अभियोजन अधिकारी के द्वारा किया गया।

कार्यशाला के प्रथम सत्र में माननीय श्री अखिलेश कुमार धाकड़, विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटीज) दतिया के द्वारा प्रतिभागियों को व्याख्यान दिया गया जिसमें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम 1989 में किये जाने वाले अनुसंधान की बारिकियां एवं विधिक बाध्यता को प्रकट करते हुये, प्रभावी अभियोजन संचालन के गुण भी बताये गये।

इसी प्रकार द्वितीय सत्र में श्री सिद्धार्थ शर्मा, उपनिरीक्षक (साइबर विशेषज्ञ) के द्वारा प्रतिभागियांे को साइबर अपराध की प्रकृति, साक्ष्य का संकलन एवं साक्ष्य अधिनियम के तहत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की ग्राह्यता के संबंध में व्याख्यान दिया गया।

तृतीय सत्र में डॉ0 मृत्युंजय सिंह तोमर (फोरेंसिक मेडिसिन विशेषज्ञ) शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय का रहा था। उक्त सत्र में डॉ. तोमर के द्वारा एमएलसी में उल्लेखित की जाने वाली चोटों के प्रकार, प्रकृति, लक्षण एवं समयावधि पर प्रकाश डाला गया तथा एफएसएल /डीएनए प्रोफाइल किस प्रकार तैयार की जायेगी तथा किस प्रकार साक्ष्य का संकलन किया जायेगा तथा उसका न्यायालयीन प्रक्रिया के तहत क्या प्रयोग होगा, के संबंध में विस्तृत व्याख्यान दिया गया।
सभी सत्रों में प्रतिभागियों ने रूचि लेकर अपने आने वाली कठिनाईयों के संबंध में समाधान प्राप्त किए। तत्पश्चात सभी प्रतिभागियों ने फीडबैक फॉर्म भरकर अपने विचार दिये गये।
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन पर श्री आर0 सी0 चतुर्वेदी, प्र. उपनिदेशक अभियोजन के द्वारा सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किये गए तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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